वास्तुशास् त्र की आठ प्रमुख दिशाएं एवं उनके महत्व वास्तुशास् त्र में आठ प्रमुख दिशाओं का जिक्र आता है, जो मनुष्य के समस्त कार्य-व्यवहारों को प्रभावित करती हैं। इनमें से प्रत्येक दिशा का अपना-अपना विशेष महत्व है। अगर आप घर या कार्यस्थल में इन दिशाओं के लिए बताए गए वास्तु सिद्धांतों का अनुपालन करते हैं, तो इसका सकारात्मक परिणाम आपके जीवन पर होता है। इन आठ दिशाओं को आधार बनाकर आवास/कार्यस्थल एवं उनमें निर्मित प्रत्येक कमरे के वास्तु विन्यास का वर्णन वास्तुशास् त्र में आता है। ब्रहांड अनंत है। इसकी न कोई दशा है और न दिशा। लेकिन हम पृथ्वीवासियों के लिए दिशाएं हैं। ये दिशाएं पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाने वाले गृह सूर्य एवं पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र पर आधारित हैं। यहां उल्लेखनीय है कि आठों मूल दिशाओं के प्रतिनिधि देव हैं, जिनका उस दिशा पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इसका विस्तृत वर्णन नीचे किया गया है। यहां हम आठ मूलभूत दिशाओं और उनके महत्व के साथ-साथ प्रत्येक दिशा के उत्तम प्रयोग का वर्णन कर रहे हैं। चूंकि वास्तु का वैज्ञानिक आधार है, इसलिए यहां वर्णित दिशा-निर्देश पूर्णतः तर्क संगत हैं...
नील सरस्वती साधना । नील सरस्वती के दो स्वरूप की उपासना होती है । सौम्य स्वरूप वाकसिद्धि , धनधान्य , शत्रु कलह शमन केलिए ओर उग्र स्वरूप तारा तंत्र की अनेक सिद्धिया प्राप्त करने केलिए । यहां सौम्य स्वरूप की उपासना का एक विधान दे रहे है । इन सौम्य स्वरूप की उपासना से अचूक फल मिलता है । शत्रु ओर कलह का शमन हो जाता है और वाकसिद्धि प्राप्त होती है जो समाज , व्यापार , राजनीति , शिक्षण , प्रवचन बिगेरा क्षेत्रमे सफलता दिलाती है । ज्योतिष भविष्यवाणी को सम्पूर्ण करने वाली नील सरस्वती साधना अगर कोई ज्योतिष नील सरस्वती की साधना कर ले, तो उसे ज्योतिष शास्त्र का सम्पूर्ण ज्ञान हो जाता हैं. नील सरस्वती की साधना को पूर्ण करने पर ज्योतिष द्वारा की गई भविष्यवाणी सत्य तथा अकाट्य हो जाती हैं तथा इस साधना को करने के बाद ज्योतिष अगर किसी व्यक्ति की कुंडली का विश्लेषण या उसके जीवन से जुडी किसी प्रकार की भविष्यवाणी कर दे, तो वह भी पूर्णत: सत्य सिद्ध हो जाती हैं.निल सरस्वती स्तोत्र पाठ करने से शत्रु ओर कलह शांत हो जाते है । साधना सामग्री :- 1. 1 नीला हकिक पत्थर ( अंगूठी में धारण ...
सर्वार्थ सिद्धि योग । शुभ कार्य तो हर समय होते रहने हैं किन्तु जब कई ग्रह अस्त हो जाते हैं तो उस शुभ कार्य नहीं हो पाते हैं। आज हम आपको सर्वार्थ सिद्धि योग के बारे में बताने जा रहे हैं। इस योग के समय कुछ शुभ कार्य किये जा सकते हैं। आइये जानते हैं सर्वार्थ सिद्धि योग के बारे में। सर्वार्थ सिद्धि योग क्या होता है । सर्वार्थ सिद्धि योग किसी शुभ कार्य को करने का शुभ मुहूर्त होता है। जैसा की आप जानते है बिना शुभ मुहूर्त के कोई भी कार्य करना लाभकारी नहीं होता, लेकिन कई बार किसी कारणवश मुहूर्त से पहले जरुरी कार्य करने पड़ सकते है। ऐसे में पुनः शुभ मुहूर्त की गणना करना थोडा मुश्किल है लेकिन शास्त्रों में इसका भी समाधान दिया गया है। जी हां, इस स्थिति में आप सर्वार्थ सिद्धि योग में उस कार्य को कर सकते है। अर्थात यदि किसी शुभ कार्य को करने के लिए आवश्यक और सही मुहूर्त नहीं मिल पा रहा है तो आप सर्वार्थ सिद्धि योगों में अपना शुभ कार्य कर सकते है। इन मुहूर्तों में शुक्र अस्त, पंचक, भद्रा आदि पर विचार करने की भी आवश्यकता नहीं होती है। क्योंकि ये मुहूर्त अपने आप में भी सिद्ध मुहूर्त होते है। इसके...
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